
मेजर ध्यानचंद के लिए भोपाल वंडर्स के खिलाड़ी बन्ने खां और कदीरउद्दीन हमेशा अड़चन बनते थे। अड़चन यह नहीं कि वे उनके पैर में स्टिक फंसा देते थे, या खेल में उनको मात देते थे, बल्कि वे ध्यानचंद का ध्यान भंग करने के लिए हर समय उनके खिलाफ पजामा पहनकर मैदान में उतरते थे। उनका यह फंडा बहुत बार काम भी कर जाता था और बन्ने खां की टीम भोपाल वांडर्स जीत भी जाया करती थी। यह बात 30-40 के दशक की है, जब ध्यानचंद देश के सबसे पुराने हॉकी टूर्नामेंटों में शुमार औबेदुल्ला खां गोल्ड कप टूर्नामेंट में झांसी की ओर से खेलने आया करते थे। उनका जन्मदिन 29 अगस्त, राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में देश भर में मनाया जाता है।
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