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Friday, 13 July 2018

अभीक बरुआ का कॉलम: एमएसपी के मुताबिक खरीद पर निर्भर ग्रामीण आमदनी

सरकार ने पिछले हफ्ते खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित कर दिया। एमएसपी बढ़ने से इकोनॉमी में महंगाई का दबाव बढ़ने के आसार हैं। रिजर्व बैंक भी अगस्त की मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। ज्यादा एमएसपी से ग्रामीण इलाकों में आमदनी बढ़ेगी। फसलों की लागत तय करने ए2+एफएल का फार्मूला चुना गया। इसमें इनपुट की लागत के साथ फैमिली लेबर यानी किसान परिवार के श्रम को भी जोड़ा जाता है। इसी आधार पर लागत का डेढ़ गुना एमएसपी तय किया गया है। धान के लिए एमएसपी लागत की तुलना में पिछले साल 39% ज्यादा थी, जिसे बढ़ाकर 50% किया है। मोटे अनाज में ज्वार का एमएसपी लागत की तुलना में 9% से बढ़कर 50% ज्यादा हुआ है। मूंग, तुअर और उड़द जैसी दालों के समर्थन मूल्य में औसतन 11% वृद्धि हुई है। बाजरा में 37% और सोयाबीन में 11.4% बढ़ोतरी की गई है।

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